विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर 2016 | भगवान विश्वकर्मा | विश्वकर्मा जी का जन्म

By | September 12, 2016

विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर 2016 को मनाया जा रहा है, जैसा कि आप सब भी जानना चाह रहे होंगे कि विश्वकर्मा पूजा के पीछे क्या  karan है । इस पोस्ट में आप जानेंगे कि विश्वकर्मा पूजा मनाने के सारे तरीके क्यों और कैसे बनाते हैं । यहां दिया जा रहा है – हिंदू धर्म के अनुसार भगवान  विश्वकर्मा निर्माण एवं सृजन के देवता कहे जाते हैं ।  ऐसा माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्ग लोक और सुदामा जी के लिए उनका घर,   इंद्रपुरी,   द्वारकाधीश भवन का निर्माण उन्होंने ही किया था । विश्कर्मा पूजा करें

इस दिन प्रमुख taur se पूजा की जाती है, माना जाता है विश्वकर्मा पूजा भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थ tithi ko मनाया जाता है । और कुछ लोग दिवाली के अगले दिन भी मनाते हैं , उस दिन अपने सभी औजार,  गाड़ी सभी की सफाई करके पूजा करते हैं | अब हम जानते हैं कि विश्वकर्मा जी का जन्म कब हुआ। हिंदू धर्म के अनुसार श्री विश्वकर्मा जी  का जन्म जब भगवान विष्णु सागर में प्रकट हुए तो विष्णु जी के नाभी कमल से ब्रह्माजी दृष्टिगोचर हो रहे थे  ।

ब्रह्मा के पुत्र उनका विवाह वस्तु से हुआ धर्म के 7 पुत्र हुए उसके पुत्र का नाम वास्तु रखा jo शिल्प शास्त्र की कला से परिपूर्ण थे और वास्तु के विवाह के पश्चात उनका एक पुत्र हुआ जिसका नाम विश्कर्मा रखा गया जो वास्तु कला के माने जाते हैं ।

विश्वकर्मा पूजा करने की विधि

विश्वकर्मा पूजा करने की विधि

विश्कर्मा पूजा कैसे करते हैं –   पूजा से एक दिन पहले ही सभी पूजन सामग्री एक जगह जमा कर ले और प्रात काल स्नान करके अपने धर्म पत्नी के साथ विश्वकर्मा पूजा करें । सबसे पहले अपने कार्य में आने वाले सभी औजारों मशीनों की सफाई करें,  फिर फूल अक्षत जल gangaajal तुलसी के पत्ते आदि लेकर पूजा करने के लिए बैठे, पूजा करते समय दीप, धूप आदि का प्रयोग भी करना शुभ माना जाता है, सबसे पहले पूजा स्थल पर एक कलश में जल और उसमें थोड़ा गंगाजल डालकर उसका स्थापित करें, फिर विश्कर्मा जी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाएं तिलक लगाएं और पूजा का मंत्र पढ़ें ।  फिर अंत में हवन करें और हवन करने के पश्चात प्रसाद का वितरण करें विश्कर्मा पूजा में कई प्रकार के फलों का प्रयोग किया जा सकता है प्रसाद स्वरूप जैसे की खीरा, सेब ,अमरुद,  केला  । यह सभी को पूजा करने के पश्चात प्रसाद स्वरूप वितरण करें  ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *